Saturday, July 25, 2020

मंज़िल

             

                   राह - ए - मंज़िल

मुश्किल से सीखना है,बहुत कुछ
अपने दम पर कर दिखाना है,बहुत कुछ
दुनिया की परवाह नहीं मुझे
खुद को साबित करके बताना है, बहुत कुछ
जानती हूं आसं नहीं राह मंज़िल की
पर काटों पे भी चल के पाना है,बहुत कुछ
जिंदगी तो आजमाईश का दूसरा नाम है
पर हर मुसीबत से सीखना है,बहुत कुछ
मुसाफिर हूं इस दुनिया में
राहों को मिला कर बनाना है बहुत कुछ
भटकते भटकते ही सही
बुलंदियों को छु कर जीत जाना है,बहुत कुछ।
                                         By- दीक्षा साह

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